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May 17, 2012 - Couplet (दोहे)    No Comments

Rahim ke dohe रहीम के दोहे

Rahim ke dohe रहीम के दोहे

कह रहीम कैसे निभे, बेर केर का संग ।
यै डोलत रस आपने, उनके फाटत अंग ।।

एकै साधे सब सधैं, सब साधे सब जाय  ।
रहिमन मूलहि सींचिबो, फूलै फलै अघाय ।।

छिमा बड़ेन को चाहिए, छोटन को उत्पात ।
का रहीम हरि को घटयौ, जो भृगु मारी लात ।।

टूटे सुजन मनाइये, जो टुटे सौ बार ।
रहिमन फिरि-फिरि पोइए, टुटे मुक्ताहार ।।

रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजै डारि ।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करै तरवारि ।।

बड़े बड़ाई नहिं करैं, बड़े न बोलें बोल ।
रहिमन हिरा कब कहै, लाख टका मेरो मोल ।।

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान ।
कहि रहीम परकाज हित, संपति सँचहि सुजान ।।

रहिमन याचकता गहे, बड़े छोट हवै जात ।
नारायन हूँ को भयौ, बावन अँगुर गात ।।

जो बड़ेन को लघु कहे, नहिं रहीम घटि जांहि ।
गिरिधर मुरलीधर कहे, कुछ दुख मानत नांहि ।।

रहिमन यहि संसार में, सब सो मिलिए धाइ ।
ना जाने केहि रूप में, नारायण मिलि जाइ ।।

अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम ।
साँचे ते तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम ।।

May 17, 2012 - Couplet (दोहे)    No Comments

Tulsi ke dohe तुलसी के दोहे

Tulsi ke dohe तुलसी के दोहे

तुलसी साथी विपत्ति के विद्या, विनय, विवेक!
साहस सुकृति सुसत्याव्रत राम भरोसे एक!!

चिंता से चतुराई घटे , घटे रूप और ज्ञान
चिंता बड़ी अभागिनी , चिंता चिता समान
तुलसी भरोसे  राम के , निश्चिंत होई के सोये
अनहोनी होनी नही , होनी होए सो होए..

 

तुलसी पावस के समय धरी कोकिलन मौन!
अब तो दादुर बोलिहं हमें पूछिह कौन!!

तुलसी इस संसार में. भांति भांति के लोग।
सबसे हस मिल बोलिए, नदी नाव संजोग॥

May 17, 2012 - Couplet (दोहे)    No Comments

Kabir ke dohe कबीर के दोहे

कबीर के दोहे  Kabir ke dohe

कंकड पाथर जोड क़े मसजिद ली चिनाय।
चढ क़र मुल्ला बांग दे क्या बहिरा हुआ खुदाय।।

कबीरा कुँआ एक है पनिहारी अनेक।
न्यारे न्यारे बर्तनों में पानी एक का एक।।

कबीर क्षुधा कूकरी, करत भजन में भंग
वाकूं टुकडा डारि के, सुमिरन करूं सुरंग
संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते हैं कि भूख कुतिया के समान है। इसके होते हुए भजन साधना में विध्न-बाधा होती है। अत: इसे शांत करने के लिक समय पर रोटी का टुकडा दे दो फिर संतोष और शांति के साथ ईश्वर की भक्ति और स्मरण कर सकते हो ।

 

May 17, 2012 - Sher-o-Shayari    No Comments

Selected Sher

Mariz-e-ishq par rehmat Khuda ki
marz badhta gaya jyon jyon dawa ki -Mir Taki Mir

Qais jungle mein akela hai, mujhe jaane do,
khoob guzregi jo mil bhaithenge diwane do. -Miyandad Khan ‘Sayyah’

Ek lafz-e-mohabbat ka adna sa fasana hai
simte to dil-e-ashiq, faile to zamana hai. -Jigar Muradabadi

Chal saath ki hasrat dil-e-marhoom se nikle
aashiq ka janaza hai, zara dhoom se nikle. -Mirza Mohd. Ali Fidvi Azimabadi

Ye zabr bhi dekha hai twareekh ki nazron ne
lamhon ne khata ki thi, sadiyon ne saza payi. -Muzaffar Razmi

Ulfat ka tab maza hai ki wo bhi hon bekrar
dono taraf aag ho barabar lagi hui. -Ismail Merthi

Bichhudne ke liye hai yeh mail milap,
ek musafir hum hai, aur ek…  aap